Kuch HIndi Sher By Naresh K. Dodia

Kuch HIndi Sher By Naresh K. Dodia
Kuch HIndi Sher By Naresh K. Dodia 


मैं यहाँ हरपल तुझे मिलने तडपती हूं और

तुं है अपने काम में हीं बस लगा रहतां है
– नरेश के.डॉडीया

जैसा भी समझौता अगर करना है कर लो यहां
कैसे भी कर के सिर्फ पाना चाहतां हूँ तुंझे
– नरेश के. डोडीया

तुम्हें गैरो से जब फुरसत मिले तो मुझ को तब आवाज़ देना 
हमारा आज भी थोड़ा सा हक हैं उस का बस एहसास देना 
- नरेश के. डोडीया

ऐसी जगह है दिल हमारां,बस शुकुन है वहां
जन्नत से कुछ अच्छा दिखाना ना चाहतां हूँ तुंझे
- नरेश के. डोडीया

मै जब रातो में गहरी नींद सोता हुं
कहीं से यादो की बारात आती हैं
- नरेश के. डोडीया

किस्से हमारे कितने भी बदनाम हो डर नहीं
फिर दोहराए एसी यारो को खबर दी जिए
- नरेश के. डोडीया

कुछ ना कुछ बो भूल जाती वो मेरे पास
फोन आया कान की बाली नही है
- नरेश के. डोडीया

एक पूरानां वाक्या मुझ को याद आयां था अभी
क्यां अभी भी याद मेरी आए तो तुम हसते हो?
- नरेश के. डोडीया

किसी भी वक्त तुंमको मिलने आउंगां कहीं भी
तुम्हारे हाथ से फिसला हुआं लम्हा नहीं हूं
- नरेश के. डोडीया

कोइ तुझ सा जब मुझे मिलता नही हैं वो आलम में
फिर मैं अपने आप की खिदमत में इक महफिल होतां हूं
- नरेश के. डोडीया
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