- कुछ हिंदी शेर - By Naresh K. Dodia

- कुछ हिंदी शेर - By Naresh K. Dodia
- कुछ हिंदी शेर - By Naresh K. Dodia
- कुछ हिंदी शेर -
तनहाई का इतना यहाँ पे शोर बढने लगा 
फुरसत तुझे हैं तो मुझे अपने सिने से लगा 
- नरेश के. डोडीया

तुम्हारा नाम मेरे नाम से अब जोड देते हैं
 तुं मेरी है चलो ये राज अब हम खोल देते हैं 
- नरेश के. डोडीया

कभी आ के गुजारो शाम मेरे साथ मे तुंम
ये दावत आम लोगो को कमी मिलती नहीं है
 – नरेश के.डॉडीया

उम्मीद तुम से बहुत है हम इस लिए तो आये हैं 
मैं जानता हूँ तुमने भी चाहत में धोखे खाये हैं 
- नरेश के. डोडीया

ये बात सही , फनकार की नजरों से देखा नहीं
 पर हुस्नवालो को नजर अंदाज़ करता नहीं
 - नरेश के. डोडीया

मुंह फुला के पूछती है आप कैसे हो साहिब 
जो कभी आंखो से मेरा हाल कह देती थी
 - नरेश के. डोडीया

 एक शायर हुं तो मेरे पास इक प्यारा सा दिल है             
आप जितना मानते हो वो खूबीया भी नही है     
- नरेश के.डॉडीया

रोज रास्तां भूल के मिलने तुझे आता हुं यार
कयुं नही कहते तुम्हे घर अपने जाना चाहिए
– नरेश के. डोडीया

हमारे पास आना है तो खुल्लेआम आ जाना                  
हमारा नाम ही काफी है मगरुर होने के लिए            
- नरेश के.डॉडीया

पुराने यार जब करते है तेरी बाते तो
कभी भी खत्म ना हो ऐसा किस्सा लगता है
- नरेश के. डोडीया

आरजू इतनी है तुझसे में लिपट जांउ मिल कें 
काम भी इतने पडे है मुझ को फुरसत नहीं है
-  नरेश के. डोडीया
  
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